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20 साल की उम्र के मुकाबले आपको 40 की उम्र में आपातकालीन फंड की ज्यादा जरूरत क्यों होती है?

बहुत से लोगों को ये गलतफ़हमी रहती है कि आपातकालीन फंड की आवश्यकता ज्यादातर बस उन्हीं लोगों को होती है जिन्होंने अभी-अभी नौकरी करना शुरू किया है, जो 20 से 30 की उम्र के बीच हैं या जिनके बच्चे अभी छोटे हैं।

आप में से लगभग सभी लोग जानते ही होंगे कि आपातकालीन फंड क्या है। सरल भाषा में कहें तो आपातकालीन फंड जमा किया गया वो पैसा है जो अचानक से आपकी नौकरी छुट जाने या किसी भी तरह के बड़े खर्चें के आ जाने पर आप इस्तेमाल कर सकते हैं और लगभग 3- 4 महीने उसके सहारे अपने लगभग सारे खर्चे उठा सकते हैं।

बहुत से लोगों को ये गलतफ़हमी रहती है कि आपातकालीन फंड की आवश्यकता ज्यादातर बस उन्हीं लोगों को होती है जो अभी 20-30 की उम्र के बीच हैं और जिन्होंने हाल ही में नौकरी करना शुरू किया है। उन्हें लगता है कि 40 की उम्र तक लगभग सभी अपने खर्चों को चलाने का तरीका बहुत अच्छे से सीख लेते हैं और आमदनी का एक रेगुलर स्त्रोत या यूं कहे कि वे एक स्थिर नौकरी तक पहुंच जाते हैं।

40 की उम्र के पड़ाव के कुछ भारतीय , खासकर बड़े शहरों में रहने वाले लोग निवेश तो करते हैं पर ज्यादातर ऐसी जरूरतों के लिए जो भविष्य में उनके सामने आने वाली होंगी। लोगों को लगता है कि आपातकालीन फंड की क्या जरुरत है। बल्कि बहुतों के तो चेहरे पर एक उलझन का भाव आ जाता है जब उनसे पूछा जाता है कि वो आपातकालीन फंड के लिए बचत करते हैं या नहीं।

क्या आपको लगता है कि आपके द्वारा की गई बचत पर्याप्त है?

 केवल निवेश करने का मतलब ये नहीं है कि आप हर आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार हैं। हम में से बहुत से लोग जीवन के उतार-चड़ाव पर तब तक ध्यान नहीं देते हैं जब तक हम खुद किसी अवांछित घटना से रूबरू नहीं होते हैं। हम में से लगभग सभी का ये मानना है कि चीजें जैसे हैं वैसे ही या उससे बेहतर ही होने वाली हैं।

इस चीज को देखते हुए यही कहना सही है कि जिंदगी में सकारात्मक रहना गलत नहीं है पर उससे भी बेहतर है सकरात्मक रहते हुए किसी भी तरह की मुसीबत के लिए हमेशा तैयार रहना।

जब आप 40 साल के होते हैं तो आप पर एक परिवार की जिम्मेदारी होती है। आप घर की क़िस्त दे रहे होते हैं और निश्चित रूप से आपके खर्चे आपकी 20 या 30 साल की उम्र में होने वाले खर्चों से कहीं ज्यादा होते हैं।

हमारे दिमाग में यही रहता है कि खर्चों के साथ-साथ हमारी आमदनी भी बढ़ी है पर हम इस बात पर कहीं ना कहीं ध्यान देना या यूं कहें कि गौर करना भूल जाते हैं कि इस बात का परिणाम क्या होगा कि अगर इस उम्र में थोड़े टाइम के लिए भी हमारी आमदनी बंद हो जाए तो।

आपके ज्यादा खर्चें किस बात का संकेत हैं?

जिंदगी के किसी भी पड़ाव में कोई भी असंतुलित जिंदगी नहीं जीना चाहता है। 40 या 50 की उम्र में किसी के भी खर्चें चरम सीमा पर होते हैं और आपातकालीन फंड भी 20 या 30 की उम्र से कहीं ज्यादा ही होते हैं।

उम्र के 20 या 30 साल के पड़ाव में आप जिंदगी खुल कर जीते हैं। इस समय अगर नौकरी छुट भी जाती है या आप खुद भी नौकरी छोड़ते हैं तो संभावित तौर पर आप 3 से 4 महीने में दूसरी नौकरी पा लेते हैं। पर आप जैसे-जैसे बड़े होते हैं, ये चीजें कम होने लगती है। इस समय अगर आपकी नौकरी किसी भी कारणवश छुटती है तो नई नौकरी ढूंढने में आपको समय लग सकता है। साथ ही इस समय आप पर बहुत से जिम्मेदारियों का कार्यभार होता है और आप खुद भी उन्हें काफी गंभीरता से लेते हैं।

बड़ी जिम्मेदारियों और बड़े खर्चों का मतलब है कि आप हर पड़ाव पर बहुत ही संभल कर कदम रखते हैं।

ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए?

ऐसी स्थिति में सबसे समझदारी इसी बात में है कि आपके निवेश का कुछ ना कुछ हिस्सा लिक्विड फंड या किसी ना किसी बैंक खाते में, आप जमा करते रहें। आपको कितना निवेश करना है ये आपकी व्यक्तिगत जरूरत या खर्चों पर निर्भर करता है। साथ ही हमेशा ध्यान रखें कि आप अपने और अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा जरूर रखें।

हमेशा सुनिश्चित करें कि आपका आपतकालीन फंड बढ़ता रहे और अगर आपकी नौकरी ऐसी है कि जिसके छुटते ही आपको आसानी से नौकरी मिलना संभव नहीं है तो कम से कम अपनी 6 महीने की आमदनी के बराबर पैसा लिक्विड फंड या बैंक में अवश्य जमा कर के रखें क्योंकि अगर आप पूरी तैयारी कर के रखेंगे तभी आप शांति से जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

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