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निजी कार रखने की असली कीमत उसकी बाजारू कीमत से होती है बहुत ज्यादा, जानें कैसे

अगर आप कार का इस्तेमाल ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो, इसकी कीमत अपने वास्तविक मूल्य से आपको तीन गुना ज्यादा चुकानी पड़ सकती है।

अगर आप कार का इस्तेमाल ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो, इसकी कीमत अपने वास्तविक मूल्य से आपको तीन गुना ज्यादा चुकानी पड़ सकती है।

सुनने में भले ही अटपटा लगे पर पांच साल के बाद कार को रखने में उसकी खुद की कीमत से ज्यादा खर्च हो जाता है। और अगर आप इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो ये इसके वास्तविक मूल्य से तीन गुना भी हो सकता है।

इसलिए कार खरीदने से पहले इसके अलग-अलग खर्चों के बारे में जान लें।

1. डेप्रिसिएशन (मूल्य कम होना)

शोरूम से निकलते ही कार का दाम कम होना शुरू हो जाता है। हर साल कार की कीमत लगभग 15% तक कम हो जाती है। 5 साल के बाद 7 लाख की कीमत रखने वाली कार का मूल्य सिर्फ 3.1 लाख तक रह जाता है। और हो सकता है कि जब आप इसे बेचें तो और भी कम पैसा मिले।

2. फ्यूल (ईंधन)

डेप्रिसिएशन के साथ-साथ फ्यूल का खर्चा भी लागत को बढ़ा देता है। अगर आप इसका ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसे कि रोजाना 100 किलोमीटर तक तो फ्यूल का खर्च ज्यादा पड़ता है।

15 किमी प्रति लीटर के माइलेज पर, आप पेट्रोल कार के लिए फ्यूल की लागत में 9 लाख रुपये हर साल खर्च करेंगे (टेबल देखें)। जबकि डीजल कारें सस्ती हो सकती हैं, ज्यादा महंगी कार खरीदते हैं तो रखरखाव के साथ खर्च ज्यादा भी हो सकता है।

3. फाइनेंस

अगर आप पांच साल के लिए कार लोन  (80%  फाइनेंसिंग पर) ले रहे हैं, तो ब्याज भुगतान कुल 1.5 लाख रुपये होगा। इसके अलावा खरीद के समय किए गए डाउन पेमेंट के लिए अवसर लागत (opportunity cost) भी है। 

4.  इंश्योरेंस 

मोटर वाहन एक्ट के तहत थर्ड पार्टी इंश्योरेंस ज़रूरी है। यह आपको किसी तीसरे पक्ष की मृत्यु, विकलांगता, चोट या संपत्ति के नुकसान के लिए भरपाई करता है। अधिकांश लोग हालांकि सभी चीजों को कवर करने वाला कार बीमा करवाते हैं जिसमें उनकी कार की दुर्घटना का कवर भी शामिल है। 7 लाख रुपये की कार के लिए, कुल प्रीमियम पांच साल की अवधि में 1.04 लाख रुपये हो सकता है। बीच में कोई भी दुर्घटना प्रीमियम को और बढ़ा सकती है।

“मोटे तौर पर, इन सभी लागतों के हिसाब से हर एक किलोमीटर वाहन चलाने के लिए 1 रुपया लगता है। औसतन, पांच साल की अवधि में 60,000 रुपये सर्विसिंग और रिप्लेसमेंट में जा सकते हैं।

 5. रख रखाव और टूट फूट

हर छह महीने या 10,000 किमी की ड्राइविंग पर, आपको अपनी कार को सर्विसिंग और रखरखाव के लिए गैरेज में भेजना होगा। नियमित रूप से तेल बदलने के साथ, क्लच प्लेट, ब्रेक पैड, फिल्टर, रेडिएटर कंपोनेंट, बैटरी और टायर जैसे कुछ हिस्सों में हल्की टूट फूट ठीक करने की ज़रूरत हो सकती है।

मोटे तौर पर, इन सभी लागतों से हर एक किलोमीटर वाहन चलाने के लिए 1 रुपया लगता है। औसतन, पांच साल की अवधि में 60,000 रुपये सर्विसिंग और रिप्लेसमेंट में जा सकते हैं।

इसके अलावा, कार की सफाई और पार्किंग शुल्क के रूप में भी खर्चे हैं।

सीखने की बात

जितना अधिक आप ड्राइव करते हैं, उतना कम प्रति किमी खर्चा है (हालांकि पूरा खर्चा नहीं)। देखा जाए तो, यह एक ठीक से इस्तेमाल करने वाले के लिए 33 रुपये प्रति किमी है, जो एक वर्ष में लगभग 6,000 किलोमीटर है। और यह 12,000 किमी प्रति वर्ष ड्राइविंग करने वालों के लिए 19.5 रुपये प्रति किमी पड़ता है।

प्रति दिन 100 किलोमीटर की ड्राइविंग करने वाले उपयोगकर्ता के लिए लागत 10.5 रुपये प्रति किमी पर आ जाती है। कम खर्च करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए टैक्सी किराए पर लेना बेहतर है। टैक्सी किराए पर लेने वाले ऐप्स 10-15 रुपये प्रति किमी (अब के लिए) के बीच कहीं भी चार्ज करते हैं; यह एक कार के मालिक से बहुत सस्ता है।

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