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28 में या 36 में मां बनना- ये आपकी खर्चों पर कैसे असर डालता है, जानें

28 में या 36 में मां बनना- ये आपकी खर्चों पर कैसे असर डालता है, जानेंआजकल शहरों की कामकाजी महिलाओं के लिए मां बनने के बारे में सोचना कोई आसान फैसला नहीं है। ऐसे में हर कोई सोचता है कि क्या उम्र के 20 वें पड़ाव में मां बनना सही है या 30 साल के बाद जब आप फाइनेंसियल तौर पर ज्यादा स्थिर होते हैं?

आजकल शहरों की कामकाजी महिलाओं के लिए माँ बनने के बारे में सोचना कोई आसान फैसला नहीं है। ऐसे में हर कोई सोचता है कि क्या उम्र के 20 वें पड़ाव में मां बनना सही है या 30 साल के बाद जब आप फाइनेंसियल तौर पर ज्यादा स्थिर होते हैं?

बच्चों पर होने वाला  खर्च

बच्चों को पालने में काफी पैसा लगता है- उसकी पढ़ाई-लिखाई, हेल्थकेयर, खाना, कपड़े या उसकी एंटरटेनमेंट की सभी चीजों पर पैसा लगता है। शुरूआती दिनों में ज्यादा खर्च हेल्थ पर होता है तो बच्चों के बड़े होने पर उनकी पढ़ाई का खर्च ज्यादा हो जाता है। आगे चल कर उनके लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट के खर्चे भी बढ़ जाते हैं।

पिछले 10 सालों में पढ़ाई और मेडिकल से जुड़े खर्च लगभग 10% तक बढ़ गए हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि आप पहले से ही अपने खर्च की जानकारी रखें। क्योंकि बाद में बच्चों का होना आपका खर्च बढ़ा सकता है। कहने का मतलब है कि हर चीज के बारे में जानकारी होना ज़रूरी है।

सेविंग्स करने का तरीका

जिन कपल्स के बच्चे जल्दी होते हैं वे बचत करने पर ज्यादा यकीन रखते हैं। साथ ही कम उम्र में पैरेंट बनने वाले अपने बच्चों का ज्यादा खयाल रखते हैं। 

कारण है कि आप 20 साल की उम्र के पड़ाव में 30 साल की उम्र के पड़ाव के मुकाबले कम कमाते हैं। 30 की उम्र के बाद आप ज्यादा कमा रहे होते हैं और आपने सेविंग भी काफी कर रखी होती है। इस तरह से आप आसानी से बच्चे के खर्चे को संभाल सकते हैं। आपकी कमाई और खर्च करने की आदत भी बढ़ जाती है और आप खर्च करने से पहले ज्यादा नहीं सोचते हैं।

आमतौर पर, जिन कपल के बच्चे बाद में होते हैं वे अपने फाइनेंशियल टार्गेट को आसानी से हासिल कर सकते हैं और उसी हिसाब से अपने रिटायरमेंट प्लान को बना सकते हैं।

एक उदाहरण लेते हैं। 20 की उम्र के पड़ाव में माता-पिता  ‘अर्ली बर्ड्स ’और 30 के दशक में  ‘लेट ब्लूमर्स’ होते हैं। मान लीजिए दोनों घरों में  5 साल की वार्षिक आय आती हैं, और मान लीजिए महिला 23 साल की है।  यह आय महिला के 65 वर्ष की होने तक प्रतिवर्ष छह प्रतिशत की दर से बढ़ती रहती है। हर एक घर वाला हर साल अपनी आमदनी का 20 प्रतिशत बचाता है; हालांकि, पैरेंटहुड के महत्वपूर्ण चरणों (0-21 वर्ष) के दौरान और शुरुआती सालों के दौरान वे अपनी आय का केवल पाँच प्रतिशत बचाते हैं। जबकि 'अर्ली बर्ड्स' का पहला बच्चा 28 साल की उम्र में होता है, जबकि देर लेट ब्लूमेर्स वालों के लिए ये उम्र 36 साल होती है।

इस डाटा से पता चलता है कि लेट ब्लूमर्स ने रिटायरमेंट के लिए 6.5 करोड़ रुपए जमा किए, जो कि अर्ली बर्ड्स द्वारा जमा किए गए  6.1 करोड़ रुपए या 5 फीसदी और ज्यादा है। यदि दोनों जोड़े पैरेंटहुड (0-21 वर्ष) (आय के पांच प्रतिशत की बचत के बजाय) के दौरान कुछ भी नहीं बचाते हैं, तो अंतर 17 प्रतिशत हो जाता है। चूंकि लेट ब्लूमर्स ने जल्दी बचत करना शुरू किया, इसलिए कंपाउंडिंग की शक्ति ने उन्हें आगे रहने में मदद की। दोनों निवेश पोर्टफोलियो के लिए 10 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न लिया गया है।

मतलब, लाइफ में थोड़ा बाद में बच्चे पैदा करने से आप अपने फाइनेंसियल और रिटायरमेंट गोल्स पर ज्यादा आसानी से पहुंच सकते हैं।

सैंडविच जनरेशन

बड़ी उम्र में बच्चे पैदा करने से आप पर बच्चे और अपने बुजुर्ग माता-पिता को संभालने की जिम्मेदारी एक साथ आ जाती है, तो आपकी बचत पर असर पड़ सकता है। जबकि जल्दी बच्चे पैदा करने पर आप एक बार बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर बाकी चीजों के लिए फिर से बचत करना शुरू कर सकते हैं। वो 50 की उम्र में कमाई ज्यादा करके अपने रिटायरमेंट के लिए ज्यादा पैसा जोड़ सकते हैं।

"सबसे पहले ध्यान रखें कि आपके पास आमदनी का एक स्टेबल स्त्रोत होना चाहिए। इसके बाद आप इमरजेंसी फंड के साथ साथ अपने रिटायरमेंट के लिए भी सेविंग्स करते रहें। अच्छी तरह से मैनेजमेंट करके चलने पर आप इस सैंडविच जनरेशन में अपनी फाइनेंसियल जरूरतों को पूरा कर पाएंगें।

पैरेंट बनने से पहले क्या करना है ज़रूरी

सबसे पहले ध्यान रखें कि आपके पास आमदनी का एक स्टेबल स्त्रोत होना चाहिए। इसके बाद आप इमरजेंसी फंड के साथ साथ अपने रिटायरमेंट के लिए भी सेविंग्स करते रहें। अच्छी तरह से मैनेजमेंट करके चलने पर आप इस सैंडविच जनरेशन में अपनी फाइनेंसियल जरूरतों को पूरा कर पाएंगें।

निष्कर्ष के तौर पर

जल्दी और देर से पैरेंट बनना कभी-कभी हमारा फैसला हो सकता है और कई बार नहीं भी। दोनों स्थिति में फाइनेंसियल तौर पर मजबूत रहें। अपने फाइनेंसियल हालत और दिल दोनों की सुनने के बाद ही फैसला लें।

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